Jyeshth Maas Ganga Snaan: ज्येष्ठ मास गंगा स्नान

'ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री'

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गंगाद्वारे कुशावर्ते बिल्वके नीलपर्वते।
तथा कनखले स्नात्वा धूतपाप्मा दिवं व्रजेत

Jyeshth Maas Ganga Snaan: जय गंगे मईया ….भारत देश नदियों और मान्यताओं का देश है.यहां नदियों को विशेष सम्मान दिया गया है.गंगा नदी यहां के निवासियों के लिए माता का रुप है. यही वजह है, कि गंगा को माता के नाम से सम्बोधित किया जाता है. इस कारण हिंदुओं के लिए गंगा स्नान बहुत महत्व रखता है. गंगा जीवन और मृत्यु दोनों से जुडी़ हुई है इसके बिना अनेक संस्कार अधूरे हैं. गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति अपने जीवन के सभी पापों से मुक्ति पाता है. गंगा नदी जिस स्थान से अपनी यात्रा प्रारम्भ करती है, उस स्थान को गंगोत्री कहा जाता है.!
गंगा नदी के भूमि पर आने के विषय में एक पौराणिक कथा प्रचलित है. कथा के अनुसार राजा भगीरथ माता गंगा को अपनी प्रजा के सुख हेतू धरती पर लाना चाहता था. इसी उद्देश्य से उन्होनें वर्षों तक कठोर तपस्या की और तपस्या से प्रसन्न होकर, गंगा सात धाराओं के रुप में भूमि पर अवतरित हुईं. इन सात धाराओं का नाम ह्रादिनी, पावनी, नलिनी, सुचक्षु, सीता और महानदी सिन्धु नदी है. स्कन्दपुराण, वाल्मीकि रामायण आदि ग्रंथों में गंगा जन्म की कथा वर्णित है.!

-:’Jyeshth Maas Ganga Snaan: गंगा मुक्ति का मार्ग’:-

गंगा जी में स्नान करने से सात्त्विकता और पुण्यलाभ प्राप्त होता है. भारत की अनेक धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी के रूप में दर्शाया गया है. अनेक पवित्र तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुये हैं. गंगा नदी को भारत की पवित्र नदियों में सबसे पवित्र नदी के रूप में पूजा जाता है. मान्यता अनुसार गंगा में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है. लोग गंगा के किनारे ही प्राण विसर्जन या अंतिम संस्कार की इच्छा रखते हैं तथा मृत्यु पश्चात गंगा में अपनी राख विसर्जित करना मोक्ष प्राप्ति के लिये आवश्यक समझते हैं. लोग गंगा घाटों पर पूजा अर्चना करते हैं और ध्यान लगाते हैं.!
गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा समस्त संस्कारों में उसका होना आवश्यक माना गया है. गंगाजल को अमृत समान माना गया है. अनेक पर्वों और उत्सवों का गंगा से सीधा संबंध है मकर संक्राति, कुंभ और गंगा दशहरा के समय गंगा में स्नान, दान एवं दर्शन करना महत्त्वपूर्ण समझा माना गया है. गंगा पर अनेक प्रसिद्ध मेलों का आयोजन किया जाता है. गंगा तीर्थ स्थल सम्पूर्ण भारत में सांस्कृतिक एकता स्थापित करता है गंगा जी के अनेक भक्ति ग्रंथ लिखे गए हैं जिनमें श्रीगंगासहस्रनामस्तोत्रम एवं गंगा आरती बहुत लोकप्रिय हैं.!
गंगा पूजन एवं स्नान से रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान की प्राप्ति होती है तथा समस्त पापों का क्षय होता है. मान्यता है कि गंगा पूजन से मांगलिक दोष से ग्रसित जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होता है. विधिविधान से गंगा पूजन करना अमोघ फलदायक होता है. गंगा स्नान करने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त होता है. अमावस्या दिन गंगा स्नान और पितरों के निमित तर्पण व पिंडदान करने से सदगती प्राप्त होती है और यही शास्त्रीय विधान भी है.!
पुराणों में एक अन्य कथा अनुसार गंगा जी भगवान विष्णु के अँगूठे से निकली हैं, जिसका पृथ्वी पर अवतरण भगीरथ के प्रयास से कपिल मुनि के शाप द्वारा भस्मीकृत हुए राजा सगर के पुत्रों की अस्थियों का उद्धार करने के लिए हुआ था. इसी कारण गंगा का दूसरा नाम भागीरथी पड़ा.!

-:’Jyeshth Maas Ganga Snaan: गंगा स्नान से क्षीण होते हैं अपकर्म’:-

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु।।
ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा से ज्येष्ठ शुक्ल दशमी अर्थात गंगा दशहरा तक गंगा नदी में स्नान करने मात्र से समस्त अपकर्मों का नाश होता है तथा अनंत पुण्यफल की प्राप्ति होती है,इस दिन गंगा नदी में स्नान करना चाहिए, ऐसा न कर सकते तो घर में ही पानी में गंगाजल डालकर नहाना चाहिए,गंगा स्नान करने से 10 तरह के पाप खत्म हो जाते हैं.।
स्मृतिग्रंथ में दस प्रकार के अपकर्म बताए गए हैं,कायिक, वाचिक और मानसिक,इनके अनुसारकिसी दूसरे की वस्तु लेना शास्त्र वर्जित हिंसा परस्त्री गमन ये तीन प्रकार के कायिक यानी शारीरिक पाप हैं, कटु बोलना,असत्य भाषण,परोक्ष में यानी पीठ पीछे किसी की निंदा करना,निष्प्रयोजन बातें करना ये चार प्रकार के वाचिक पाप हैं,इनके अलावा परद्रव्य को अन्याय से लेने का विचार करना,मन में किसी का अनिष्ट करने की इच्छा करना,असत्य हठ करना ये तीन प्रकार के मानसिक पाप हैं.!

-:’Jyeshth Maas Ganga Snaan: गंगा स्नान के नियम’:-

01.गंगा स्नान से पहले सामान्य जल से अच्छे से स्नान कर लें,गंगा नदी में सिर्फ डूबकी लगाएं,पवित्र नदी में शरीर का मेल न निकालें.!

02. गंगा नदी में मनुष्य की अशुद्धि नहीं जानी चाहिए,स्नान करते समय शरीर को हाथों से नहीं रगड़ना चाहिए.!

03. गंगा स्नान करने के बाद शरीर को कपड़े से नहीं पोंछना चाहिए,जल को शरीर पर की सुखने देना चाहिए.!

04. मृत्यु या जन्म सूतक के समय भी गंगा स्नान किया जा सकता है,लेकिन महिलाओं को अपवित्र स्थिति में गंगा स्नान नहीं करना चाहिए.!

05.घर पर स्नान की स्थिति में गंगाजल की कुछ बूंदे या कम मात्रा ही नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करना चाहिए.!

नोट :- अपनी पत्रिका से सम्वन्धित विस्तृत जानकारी अथवा ज्योतिष, अंकज्योतिष,हस्तरेखा, वास्तु एवं याज्ञिक कर्म हेतु सम्पर्क करें.!

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