Mesh Sankranti 2023: सूर्य मेष/बैसाख संक्रान्ति

'ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री'

Mesh Sankranti 2023: सूर्य मेष/बैसाख संक्रान्ति
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“ऊँ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयत।।”

Mesh Sankranti 2023: ॐ घृणि सूर्याय नमः ……वैशाख माह में आने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है बैसाखी.इस वर्ष यह पर्व 14 अप्रैल 2023 को मनाया जाएगा.बैसाखी का आगमन प्रकृत्ति के परिवर्तन को दर्शाता है.सूर्य का मेष राशि में प्रवेश बैसाखी का आगमन है.बैसाखी पर्व विशेष रुप से किसानो का पर्व है.भारत के उत्तरी प्रदेशो विशेष कर पंजाब में इस दिन किसानो की गेहूँ की फसल पक कर तैयार हो जाती है.अपने खेतों में गेहूँ की भरी बालियां देख कर किसान फूले नही समाते. इस दिन किसान नाच गाकर भगवान को अपना धन्यवाद प्रकट करते है.!

वैशाख संक्रांति में सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे.वैशाख संक्रान्ति 14 अप्रैल 2023, को शुक्रवार के दिन दोपहर को 14:58 मिनिट पर आरंभ होगी.30 मुहूर्त्ति इस संक्रान्ति के स्नान दान आदि का पुण्यकाल का समय 06:01 से आरंभ होगा.!

वैशाख मास में नित्यप्रति प्रात: काल सूर्योदय से पूर्व शुद्ध जल में तीर्थस्थान यथाशक्ति अनाज, वस्त्रों, फलादि का दान करने का विधान व महत्व कहा गया है. यह विधान करने वाले व्यक्ति के जीवन से रोग-शोक दूर होते है. तथा आरोग्य, धन, सम्पादि सुखों की प्राप्ति होती है.!

-:”Mesh Sankranti 2023: इस लिए मनाया जाता है बैशाखी का पर्व”:-

बैसाखी पर्व एक लोक परंपरागत त्यौहार है.किसान खरीफ की फसल के पकने पर अपनी खुशी के इजहार के रुप मे बैसाखी पर्व मनाते है. खेतो में गेहूँ के अलावा और भी फसलें उगाई जाती हैं जैसे दाले, तिल और गन्ना यह सभी फसलें गेहूँ के साथ ही तैयार हो जाती है.!

पंजाब में इस समय खेतों में हर तरफ गेहूँ की बाकी हवा के साथ लहराती हुई मन को मोह लेती है. अपने भरे हुये खेतों को देख कर तथा अपनी मेहनत के इस रूप को देख किसान फूले नही समाते. इस दिन किसान गेहूँ की कुछ बालियां अग्नि देव के समक्ष अर्पण करते हैं तथा कुछ भाग प्रसाद के रुप सभी लोगों को दिया जाता है. इस पर्व पर पंजाब के लोग अपने रीति रिवाज के अनुसार भांगडा तथा गिद्धा करते हैं. गेहूँ के बीजा रोपण के दिन से किसान उसके तैयार होने के लिये जी तोड मेहनत करते हैं. इस दिन अपनी तैयार फसल को काटकर किसान खुशी के रुप में बैसाखीपर्व मनाते हैं.!

-:”Mesh Sankranti 2023: बैसाखी पर्व पंजाब की लोक संस्कृति को दर्शाता है”:-

बैसाखी पर्व विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और इसके आस पास के प्रदेशों में मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार है. यह पर्व यहां कुछ मुख्य बातों से जुड़ कर और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि एक तो यह खरीफ की फसल के पकने की खूशी लाता है और दूसरी ओर इसी दिन सिखों के दसवें गुरू गोविंदसिंह जी ने इस दिन खालसा पंथ की नींव रखी थी. इस के अतिरिक्त इस समय सर्दियों की समाप्ति और गर्मीयों का आरंभ भी होता है अत: इसी के आधार स्वरुप लोक परंपरा धर्म और प्रकृति के परिवर्तन से जुडा़ यह समय बैसाखी पर्व की महत्ता को दर्शता है.!

-:”Mesh Sankranti 2023: बैसाखी का त्यौहार पर्व नये संवत की शुरुआत का दिन होता है”:-

अप्रैल माह के 13 या 14 तारीख को जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तब वह समय हिदुओं के नव वर्ष का दिन होता है. इस दिन से नये संवत की शुरुआत होती है. इस दिन को संपूर्ण भारत में पर्व के रुप में मनाया जाता है. इस दिन लोग सुगंधित पकवान बनाकर एक दूसरे को बधाई देते हैं…!
इस दिन दुर्गा माता जी तथा शंकर भगवान की पूजा होती है. कई जगह व्यापारी लोग आज के दिन नये वस्त्र धारण करके अपने बहीखातों का आरम्भ करते हैं. यह पर्व सभी शिक्षा संस्थानों में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन विद्यार्थीयों द्वारा कई रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते है और प्रतिभावान विद्यार्थीयों को पुरस्कार बांटे जाते हैं..!

-:”Mesh Sankranti 2023: खालसा पंथ की स्‍थापना”:-

13 अप्रैल 1699 को दसवें गुरु गोविंद सिंहजी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी.इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह ने गुरुओं की वंशावली को समाप्त कर दिया.इसके बाद सिख धर्म के लोगों ने गुरु ग्रंथ साहिब को अपना मार्गदर्शक बनाया.बैसाखी के दिन ही सिख लोगों ने अपना सरनेम सिंह {शेर} को स्वीकार किया. दरअसल यह टाइटल गुरु गोबिंद सिंह के नाम से आया है.!

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