Navratri Kanya Puja Vidhi: कन्या पूजन व खैत्री {हरियाली} विसर्जन विधि

'ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री'

Navratri Kanya Puja Vidhi: कन्या पूजन व खैत्री {हरियाली} विसर्जन विधि
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ॐ अम्बे अम्बिके अम्बालिके नमानयति कश्चन ।
ससत्स्यकश्चकः सुभद्रिकां काम्पीलवासिनीं ।।

Navratri Kanya Puja Vidhi: जय माता दी………नवरात्री में कन्या पूजन का विशेष महत्व है,अष्टमी अथवा नवमी का दिन कन्या पूजन के लिए क्षेष्ठ दिन माना जाता है,इस वर्ष वसंत चैत्र नवरात्र 22 मार्च से आरम्भ होकर 30 मार्च को पूर्ण होंगी,भक्त/उपासक/साधक इन दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा करते है,इसके साथ ही अष्टमी और नवमी के दिन कन्‍याओं की पूजा कर व्रत का उद्यापन करते हैं.मान्यता है कि इन कन्याओं को देवियों की तरह आदर सत्कार और भोज कराने से मां नवदुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और अपने भक्तों को सुख समृद्धि का वरदान देती है.!

Navratri Kanya Puja Vidhi: अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का महत्व

भविष्यपुराण और देवीभागवत पुराण के अनुसार नवरात्र पर्व के अंत में कन्या पूजन आवश्यक होता है,कन्या पूजन के बिना नवरात्र व्रत को अधूरा माना जाता है,कन्या पूजन अष्टमी या नवमी में से किसी एक दिन करना श्रेष्ठ माना जाता है,कन्या पूजन के लिए दस वर्ष तक की नौ कन्याओं की आवश्यकता होती है,इन नौ कन्याओं की लोग को मां दुर्गा के नौ रूप समझकर ही पूजा करनी चाहिए..!
नवरात्र के दौरान कन्या पूजन का बडा महत्व है,नवरात्रि के दिनों में कुछ लोग अष्टमी के दिन और कुछ नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं,परिवार की रीति के अनुसार किसी भी दिन कन्या पूजन किया जा सकता है,नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिविंब के रूप में पूजने के बाद ही भक्तों का नवरात्र व्रत पूरा होता है,अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्हें भोग लगाकर दक्षिणा देने मात्र से ही मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को उनका मन चाहा वरदान देती हैं….!
देवीभागवत पुराण के अनुसार कन्या पूजन में केवल दो वर्ष से बड़ी और दस या दस वर्ष से छोटी आयु की कन्याओं को ही शामिल करना चाहिए.ी
दो साल की कन्या कुमारी,तीन साल की कन्या त्रिमूर्ति,चार साल की कन्या कल्याणी,पांच साल की कन्या रोहिणी,छ: साल की कन्या कालिका,सात साल की कन्या चंडिका,
आठ साल की कन्या शाम्भवी,नौ साल की कन्या दुर्गा और दस साल की कन्या सुभद्रा मानी जाती हैं,कन्या पूजा करते समय इन देवियों के नामों को मन में याद करना चाहिए…..!

Navratri Kanya Puja Vidhi: कन्या पूजन विधि

3 से 9 साल तक आयु की कन्याओं तथा साथ ही एक लांगुरिया {छोटा लड़का} को खीर,पूरी, हलवा,चने की सब्जी आदि खिलाए जाते हैं…!
-: कन्याओं को तिलक करके,हाथ में मौली बांधकर,गिफ्ट दक्षिणा आदि देकर आशीर्वाद लिया जाता है,फिर उन्हें विदा किया जाता है…!

Navratri Kanya Puja Vidhi:नवमी पूजन और विसर्जन

-: महानवमी के दिन मां का विशेष पूजन करके पुन: पधारने का आवाहन कर,स्वस्थान विदा होने के लिए प्रार्थना की जाती है..!
-: कलश के जल का छिड़काव परिवार के सदस्यों पर और पूरे घर में किया जाता है ताकि घर का प्रत्येक स्थान पवित्र हो जाए..!
-: अनाज के कुछ हरियाली/खेत्री/अंकुर मां के पूजन के समय चढ़ाए जाते हैं,कुछ अंकुर दैनिक पूजा स्थल पर रखे जाते हैं,शेष अंकुरों को बहते पानी में प्रवाहित कर दिया जाता है..!
-: कुछ लोग इन अंकुरों को शमी/तुलसी/आम/बिल्व वृक्ष को अर्पित करते हैं और लौटते समय इनमें से कुछ अंकुर केश में धारण करते हैं…!
ज्ञात हो कि देवी का आठवां रूप मां महागौरी है,इनका अष्टमी के दिन पूजन का विधान है,इनकी पूजा सारा संसार करता है,पूजन करने से समस्त पापों का क्षय होकर कांति बढ़ती है,सुख में वृद्धि होती है,शत्रु शमन होता है और नवमी के दिन सिद्धियों को देने वाली सिद्धिदात्री का पूजन-अर्चन करने का विधान है,इसी दिन महानवमी पूजन और विसर्जन करना मंगलकारी माना गया है…!

नोट :- अपनी पत्रिका से सम्वन्धित विस्तृत जानकारी अथवा ज्योतिष,अंकज्योतिष,हस्तरेखा,वास्तु एवं याज्ञिक कर्म हेतु सम्पर्क करें…!

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