Papmochani Ekadashi 2023: पापमोचनी एकादशी

'ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री'

Papmochani Ekadashi 2023: पापमोचनी एकादशी
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श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

Papmochani Ekadashi 2023: नमो नारायण……पाप मोचनी एकादशी व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है. वर्ष 2023 में पापमोचनी एकादशी व्रत 18 मार्च के दिन किया जायेगा.पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी पापों को नष्ट करने वाली होती है. स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इसके फल एवं प्रभाव को अर्जुन के समक्ष प्रस्तुत किया था.!

पापमोचनी एकादशी व्रत साधक को उसके सभी पापों से मुक्त कर उसके लिये मोक्ष के मार्ग खोलती है. इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी का पूजन करना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति इस पूजा को षोडशोपचार के रुप में करने पर व्रत के शुभ फलों में वृद्धि होती है.!

Papmochani Ekadashi 2023: पापमोचनी एकादशी 2023 मुहूर्त

चैत्र कृष्ण एकादशी तिथि शुक्रवार 17 मार्च 2023, को मध्यान 14 बजकर 07 मिनट से आरम्भ होगी तथा शनिवार 18 मार्च 2023 को पूर्वाह्न 11 बजकर 14 मिनट कर समाप्त होगी,उदयातिथि के अनुसार शनिवार 18 मार्च 2023 को पापमोचनी एकादशी का व्रत रखना शास्त्र सम्मत होगा.!

Papmochani Ekadashi 2023: पाप मोचनी एकादशी व्रत विधि

पाप मोचनी एकादशी के विषय में भविष्योत्तर पुराण में विस्तार से वर्णन किया गया है. इस व्रत में भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है, व्रती दशमी तिथि को एक बार सात्विक भोजन करे और मन से भोग विलास की भावना को निकालकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करनी चाहिए. एकादशी के दिन सूर्योदय काल में स्नान करके व्रत का संकल्प करना चाहिए संकल्प के उपरान्त षोड्षोपचार सहित श्री विष्णु की पूजा करें.!

पूजा के पश्चात भगवान के समक्ष बैठकर भग्वद् कथा का पाठ अथवा श्रवण करना चाहिए. एकादशी तिथि को जागरण करने से कई गुणा पुण्य मिलता है अत: रात्रि में भी निराहार रहकर भजन कीर्तन करते हुए जागरण करें. द्वादशी के दिन प्रात: स्नान करके विष्णु भगवान की पूजा करें फिर ब्रह्मणों को भोजन करवाकर दक्षिणा सहित विदा करें पश्चात स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए.!

Papmochani Ekadashi 2023: पापमोचनी एकादशी पौराणिक कथा

कथा के अनुसार भगवान अर्जुन से कहते हैं, राजा मान्धाता ने एक समय में लोमश ऋषि से जब पूछा कि प्रभु यह बताएं कि मनुष्य जो जाने अनजाने पाप कर्म करता है उससे कैसे मुक्त हो सकता है. राजा मान्धाता के इस प्रश्न के जवाब में लोमश ऋषि ने राजा को एक कहानी सुनाई कि चैत्ररथ नामक सुन्दर वन में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या में लीन थे.!इस वन में एक दिन मंजुघोषा नामक अप्सरा की नज़र ऋषि पर पड़ी तो वह उन पर मोहित हो गयी और उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने हेतु यत्न करने लगी. कामदेव भी उस समय उधर से गुजर रहे थे कि उनकी नज़र अप्सरा पर गयी और वह उसकी मनोभावना को समझते हुए उसकी सहायता करने लगे. अप्सरा अपने यत्न में सफल हुई और ऋषि कामपीड़ित हो गये.!काम के वश में होकर ऋषि शिव की तपस्या का व्रत भूल गये और अप्सरा के साथ रमण करने लगे. कई वर्षों के बाद जब उनकी चेतना जगी तो उन्हें एहसास हुआ कि वह शिव की तपस्या से विरत हो चुके हैं उन्हें तब उस अप्सरा पर बहुत क्रोध हुआ और तपस्या भंग करने का दोषी जानकर ऋषि ने अप्सरा को पिशाचनी होने का श्राप दे दिया. श्राप से दु:खी होकर वह ऋषि के पैरों पर गिर पड़ी और श्राप से मुक्ति के लिए अनुनय करने लगी.!अप्सरा की याचना से द्रवित हो मेधावी ऋषि ने उसे विधि सहित चैत्र कृष्ण एकादशी का व्रत करने के लिए कहा भोग में निमग्न रहने के कारण ऋषि का तेज भी लोप हो गया था अत: ऋषि ने भी इस एकादशी का व्रत किया जिससे उनका पाप नष्ट हो गया. उधर अप्सरा भी इस व्रत के प्रभाव से पिशाच योनि से मुक्त हो गयी और उसे सुन्दर रूप प्राप्त हुआ व स्वर्ग के लिए प्रस्थान कर गयी.!

Papmochani Ekadashi 2023:पापमोचनी एकादशी महत्व

सनातन धर्म में पापमोचनी एकादशी व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है,इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु की आराधना करने से सभी अनजाने में हुई गलतियों से मुक्ति मिल जाती है और सभी दुख दूर हो जाते हैं,पापमोचनी एकादशी के दिन पाप से मुक्ति पाने के लिए श्रीहरि विष्णु की विधि विधान से पूजा की जाती है.चैत्र माह की पहली एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहते हैं.कहा जाता है कि जो व्यक्ति पापमोचिनी एकदाशी का व्रत करता है उसे गाय दान करने जितने पुण्य मिलता है. प्राचीन काल में इस व्रत के प्रभाव से एक अप्सरा पिशाच यौनी से मुक्ति मिलती थी और उसके समस्त पाप नष्ट हो गए थे.इस साल पापमोचनी एकादशी बहुत शुभ संयोग लेकर आ रही है. इसमें व्रती को विष्णु जी की पूजा का कई गुना फल प्राप्त होगा.!

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