Shani Pradosh Vrat 2023: शनि प्रदोष व्रत 2023

'ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री'

Shani Pradosh Vrat 2023
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Shani Pradosh Vrat 2023: ॐ नमः शिवाय…..प्रत्येक चन्द्र मास की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखने का विधान है. यह व्रत कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों को किया जाता है.04 मार्च 2023 को शनिवार के दिन शनि प्रदोष व्रत किया जायेगा,सूर्यास्त के बाद के 02 घण्टे 24 मिनट का समय प्रदोष काल के नाम से जाना जाता है.सामान्यत: सूर्यास्त से लेकर रात्रि आरम्भ तक के मध्य की अवधि को प्रदोष काल में लिया जा सकता है.यह व्रत उपवासक को बंधनों से मुक्त करने वाला होता है. इस व्रत में भगवान शिव की पूजन किया जाता है.!

शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत को लेकर एक पौराणिक तथ्य है कि इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति जन्म- जन्मान्तर के फेरों से निकल कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढता है तथा उसे उत्तम लोक की प्राप्ति होती है.!

Shani Pradosh Vrat 2023 -:शनि प्रदोष व्रत विधि:-

प्रदोष व्रत करने के लिये त्रयोदशी के दिन प्रात: सूर्य उदय से पूर्व उठना चाहिए. नित्यकर्मों से निवृत होकर, भगवान श्री भोले नाथ का स्मरण करें. इस व्रत में आहार नहीं लिया जाता है और पूरे दिन उपावस रखने के बाद सूर्यास्त से एक घंटा पहले, स्नान आदि कर श्वेत वस्त्र धारण किये जाते है.! ईशान कोण की दिशा में किसी एकान्त स्थल को पूजा करने के लिये प्रयोग करना विशेष शुभ रहता है. पूजन स्थल को गंगाजल या स्वच्छ जल से शुद्ध करने के बाद, मंडप तैयार किया जाता है. इस मंडप में पद्म पुष्प की आकृति पांच रंगों का उपयोग करते हुए बनाई जाती है.!

प्रदोष व्रत कि आराधना करने के लिये कुशा के आसन का प्रयोग किया जाता है. इस प्रकार पूजन क्रिया की तैयारियां कर उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और भगवान शंकर का पूजन करना चाहिए. पूजन में भगवान शिव के मंत्र “ॐ नम: शिवाय” इस मंत्र का जाप करते हुए शिव को जल का अर्ध्य देना चाहिए.!
इस व्रत का उद्धापन करने के लिये त्रयोदशी तिथि का चयन किया जाता है. उद्धापन से एक दिन पूर्व श्री गणेश का पूजन किया जाता है. पूर्व रात्रि में कीर्तन करते हुए जागरण किया जाता है.! हवन समाप्त होने के बाद भगवान भोलेनाथ की आरती की जाती है. और शान्ति पाठ किया जाता है. अंत में ब्रह्माणों को भोजन कराया जाता है तथा अपने सामर्थ्य अनुसार दान दक्षिणा देकर आशिर्वाद प्राप्त किया जाता है.!

Shani Pradosh Vrat 2023-:शनि प्रदोष व्रत कथा:–

शनि प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीनकाल में एक नगर सेठ थे,सेठजी के घर में हर प्रकार की सुख-सुविधाएं थीं लेकिन संतान नहीं होने के कारण सेठ और सेठानी हमेशा दुःखी रहते थे,काफी सोच-विचार करके सेठजी ने अपना काम नौकरों को सौंप दिया और खुद सेठानी के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े,अपने नगर से बाहर निकलने पर उन्हें एक साधु मिले,जो ध्यानमग्न बैठे थे, सेठजी ने सोचा,क्यों न साधु से आशीर्वाद लेकर आगे की यात्रा की जाए.!
सेठ और सेठानी साधु के निकट बैठ गए,साधु ने जब आंखें खोलीं तो उन्हें ज्ञात हुआ कि सेठ और सेठानी काफी समय से आशीर्वाद की प्रतीक्षा में बैठे हैं,साधु ने सेठ और सेठानी से कहा कि मैं तुम्हारा दुःख जानता हूं। तुम शनि प्रदोष व्रत करो, इससे तुम्हें संतान सुख प्राप्त होगा,साधु ने सेठ-सेठानी प्रदोष व्रत की विधि भी बताई और भगवान शंकर की यह वंदना बताई.!

Shani Pradosh Vrat 2023-:”भगवान शंकर की वंदना”:-

हे रुद्रदेव शिव नमस्कार।
शिवशंकर जगगुरु नमस्कार।।
हे नीलकंठ सुर नमस्कार।
शशि मौलि चन्द्र सुख नमस्कार।।
हे उमाकांत सुधि नमस्कार।
उग्रत्व रूप मन नमस्कार।।
ईशान ईश प्रभु नमस्कार।
विश्‍वेश्वर प्रभु शिव नमस्कार।।
दोनों साधु से आशीर्वाद लेकर तीर्थयात्रा के लिए आगे चल पड़े,तीर्थयात्रा से लौटने के बाद सेठ और सेठानी ने मिलकर शनि प्रदोष व्रत किया जिसके प्रभाव से उनके घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ..!

Shani Pradosh Vrat 2023-:’शनि प्रदोष व्रत महत्व’:-

प्रत्येक मास की दोनों त्रयोदशी के व्रत पुण्य को काफी फलदायी माना गया है लेकिन भगवान शिव के भक्त शनि देव के दिन त्रयोदशी का व्रत समस्त दोषों से मुक्ति देने वाला माना जाता है,इस व्रत के बारे में ऐसी मान्यता है कि संतान प्राप्ति की कामना के लिये शनि त्रयोदशी का व्रत विशेष रूप से सौभाग्यशाली माना जाता है,इसके अलावा इस व्रत को रखने से इंसान के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें मान-सम्मान और प्रतिष्ठा की भी प्राप्ति होती है.!
शनि प्रदोष के दिन सायंकाल समय जब सूर्य अस्त हो और रात की शुरुआत हो उस समय को प्रदोष काल कहते हैं,प्रदोष काल में भगवान् शिव जी पिंडी स्वरूप में विध्यमान हुए थे,इसलिए इस समय भगवान शिव जी का स्मरण करें और उनका पूजन करें,कहा जाता है ऐसा करने से इंसान को उत्तम फल मिलता है,प्रदोष व्रत से चंद्रमा के अशुभ प्रभावों से भी इंसान को मुक्ति मिलती है,ऐसे में शनि प्रदोष के दिन विधि अनुसार पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व बताया गया है,इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के बाद शनि देव का पूजन भी अवश्य करना चाहिए.!

Shani Pradosh Vrat 2023-:शनि प्रदोष व्रत फल:-

शनिवार के दिन पडने वाला प्रदोष व्रत करना चाहिए. अपने उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए जब प्रदोष व्रत किये जाते है, तो व्रत से मिलने वाले फलों में वृद्धि होती है.शनि प्रदोष व्रत द्वारा संतान सुख प्राप्त होता है…..!

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