Your Kitchen and Vastu: आपकी किचन और वास्तु

'ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री'

your kitchen and vastu
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अन्नं ब्रह्मा रसं विष्णु भोक्ता देवो जनार्दनम्.।
एवं ध्यात्वा तथा ज्ञात्वा अन्न दोषो न लिप्यते.II

Your Kitchen and Vastu: जय नारायण की… एक उपमा दी जाती हैं कि यदि आपको ब्यक्ति विशेष के मन में स्थान प्राप्त करना हो तो उसके लिए सर्वोत्तम मार्ग होता हैं ब्यक्ति का उदर अर्थात पेट,और यदि आप पाक कला में निपुण हैं.तो निश्चय ही आपका हर कोई सम्मान करेगा.और आपके लिए यह आसान हैं.I
आपका घर चाहे कितना भी बड़ा हो,कितने भी मंजिला हो अथवा कितने भी कक्ष का हों,लेकिन आपका भोजनालय/रसोईघर अर्थात किचन ही इन सब में सर्वोच्च होता हैं,चाहे आपकी किचन छोटी हो अथवा बड़ी हो,पौराणिक भोजनशाला हो अथवा अत्याधुनिक मॉडुलर किचन हों,लेकिन आपका भोजनालय/रसोईघर/किचन वास्तु के अनुरूप बना हों तभी यह आप सहित सभी पारिवारिक सदस्यों लिए सर्वोत्तम रहता हैं.I

-:आपने कभी सोचा कि आपकी किचन सही दिशा में हैं या नहीं..?
-:क्या जब आप/अथवा आपका घरेलु सहायक/सहायिका भोजन बनाती/बनाते हैं तो आपका मुह सही दिशा में होता हैं अथवा नहीं…?
-:आपके किचन में पानी उत्तम दिशा में स्थापित हैं या नहीं..?
-:तो आईये इन सूत्रों के माध्यम से आप अपने भोजनकक्ष/किचन को वास्तु के अनुरूप बना कर अपनी भोजनशाला से भोजन के साथ प्रेम,समर्पण,आयु आरोग्यता,सम्पन्नता,एवं प्रसिद्धि को भी परोस सकती हैं.।

01.भोजनालय (किचन) के लिए वास्तु के अनुसार आदर्श स्थान दक्षिण-पूर्व कोना (आग्रेय कोण) होता है,दूसरे स्थान के रूप में उत्तर-पश्चिम या वायव्य कोण में भी रसोई का निर्माण किया जाए तो अच्छा रहता है.।
02.दक्षिण, पश्चिम, उत्तर, ईशान कोण एवं नैऋत्य कोण भोजनालय (किचन) के लिए वर्जित होते हैं.।
03. भोजनालय (किचन) में गैस सिलैंडर और चूल्हा स्थापन इस प्रकार होना चाहिए कि खाना बनाने वाले का मुह पूर्व/उत्तर की तरफ हो.।
04.भोजनालय (किचन) में जल और अग्रि साथ-साथ न हों इसके लिए बर्तन साफ़ करने का सिंक और पानी के नल.चूल्हे से दूर होने चाहिएं.।
05. भोजनालय (किचन) में अवन इत्यादि बिजली उपकरण अग्रि कोण में स्थापित करने चाहिएं.।
06. फ्रिज दक्षिण-पश्चिम में तथा एग्जॉस्ट फैन ईशान कोण में होना चाहिए.।
07. भोजनालय (किचन) गैस चूल्हे के ऊपर सामान रखने के लिए अलमारियों का निर्माण नहीं करवाना चाहिए,हवा का आवागमन सुगमता से हो सके,इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए.।
08.भोजनालय (किचन) की दीवार से लगा हुवा अथवा इसके ऊपर या नीचे शौचालय नहीं होना चाहिए।
09.भोजनालय (किचन) के एकदम मध्य में बैठकर कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए साथ ही रसोई घर का चूल्हा बाहर बैठे व्यक्ति को दिखाई भी नहीं देना चाहिए.।
10.भोजनालय (किचन) के ऊपर या नीचे सोने का कमरा या पूजा कक्ष न हो,इसका भी विशेष ध्यान रखना जरूरी है.।
11.रसोई के उत्तर-पूर्व की ओर हल्के सामान का भंडारण करें,जबकि दक्षिण और पश्चिम की ओर भारी वस्तुओं का,भोजन कक्ष का निर्माण रसोई घर के नजदीक ही करना चाहिए,यथा संभव पूर्व या पश्चिम की तरफ हो.।
12. भोजन कक्ष में बैठने का आयोजन इस प्रकार हो कि खाने वाले का मुंह दक्षिण की तरफ न हो.।
13. भोजनालय (किचन) में रंगों का आयोजन बहुत हल्का होना चाहिए,वास्तु अनुसार ही रंगों का चयन हो तो रसोई समृद्धशाली बनती है,हल्का हरा,हल्का नींबू जैसा रंग, हल्का संतरी या हल्का गुलाबी.।
14.किचन की ऊँचाई 10 से 11 फीट होनी चाहिए और गर्म हवा निकलने के लिए वेंटीलेटर होना चाहिए,यदि 4-5 फीट में किचन की ऊँचाई हो तो महिलाओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कभी भी किचन से लगा हुआ कोई जल स्त्रोत नहीं होना चाहिए। किचन के बाजू में बोर, कुआँ,बाथरूम नहीं बनाना चाहिए,सिर्फ वाशिंग स्पेस दे सकते हैं.।
15.भोजनालय (किचन) में सूर्य की रोशनी सबसे ज्यादा आए,इस बात का हमेशा ध्यान रखें,किचन की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें,क्योंकि इससे सकारात्मक व पॉजिटिव एनर्जी आती है.।
16. भोजनालय (किचन) हमेशा दक्षिण-पूर्व कोना जिसे अग्निकोण (आग्नेय) कहते है,में ही बनवाना चाहिए,यदि इस कोण में किचन बनाना संभव न हो तो उत्तर-पश्चिम कोण जिसे वायव्य कोण भी कहते हैं पर बनवा सकते हैं.।
17. किचन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्लेटफार्म हमेशा पूर्व में होना चाहिए और ईशान कोण में सिंक व अग्नि कोण चूल्हा लगाना चाहिए.।
18. भोजनालय (किचन) के दक्षिण में कभी भी कोई दरवाजा या खिड़की नहीं होने चाहिए,खिड़की पूर्व की ओर में ही रखें.।
19. किचन में कभी भी काले रंग ग्रेनाइट का पत्थर फ्लोर या प्लेटफार्म पर नहीं लगाना चाहिए.।
20.भोजनालय (किचन) में लॉफ्ट,अलमारी दक्षिण या पश्चिम दीवार में ही होना चाहिए.।
21.भोजनालय (किचन) पानी फिल्टर ईशान कोण में लगाएँ.I
22 .भोजनालय (किचन) में मीरर या मिरर जैसी कोई वास्तु नहीं होनी चाहिए,क्योंकि इससे विपरित प्रभाव पड़ता है और घर में कलह की स्थिति बढ़ती है.।
23 .भोजनालय (किचन) में स्वछता का विशेष ध्यान रखें.किचन में गन्दगी होने से पारिवारिक जनो से स्वास्थय पर नकारात्मक प्रभाव पढ़ सकता हैं.।
24.प्रातः स्नान के बाद ही भोजनालय (किचन) में प्रवेश करें माता अन्नपूर्णा सदेव आपके भंडार भर के अवश्य रखिंगी.।

नोट :- अपनी पत्रिका से सम्वन्धित विस्तृत जानकारी अथवा ज्योतिष, अंकज्योतिष,हस्तरेखा, वास्तु एवं याज्ञिक कर्म हेतु सम्पर्क करें.!

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