Karwa Chauth 2023: करवा चौथ व्रत

'ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री'

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“ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री”
‘नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।’

Karwa Chauth 2023: ॐ नमो नारायण…कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करवा चौथ का व्रत किया जाता है, पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन चंद्रमा की पूजा अर्चना की जाती है. करवा चौथ व्रत को करक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है. इस वर्ष करवा चौथ का त्योहार 01 नवम्बर 2023 को मनाया जाएगा. करवा चौथ का व्रत अपने पति के स्वास्थय और दीर्घायु के लिये किया जाने वाला व्रत है.!
उत्तरी भारत में यह व्रत आज श्रद्धा व विश्वास की सीमाओं से आगे निकलकर, नये रंग में रंग गया है.करवा चौथ आज अपने प्रेमी, होने वाले पति और जीवन साथी के प्रति स्नेह व्यक्त करने का प्रर्याय बन गया है.आज यह केवल सुहागिनों का व्रत ही न रहकर, पतियों के द्वारा अपनी पत्नियों के लिये रखा जाने वाला पहला व्रत बन गया है.!
करवा चौथ के व्रत ने बाजारीकरण को कितना लाभ पहुंचाया है, यह तो स्पष्ट है,परन्तु यह व्रत वैवाहिक जीवन को सफल और खुशहाल बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. क्योकि करवा़चौथ अब केवल लोक परम्परा न रहकर, भावनाओं के आदान-प्रदान का पर्व बन गया है.!

-:’Karwa Chauth 2023: करवा चौथ का शुभ मुहूर्त’:-
अमृत काल मुहूर्त- सायंकालीन 17 बजकर 11 मिनट से लेकर शाम 19 बजकर 31 मिनट तक
चंद्रोदय :- करवा चौथ बुधवार 01 नवम्बर 2023 को राष्ट्रिय राजधानी दिल्ली क्षेत्र के आस-पास के नगरों में चंद्रोदय रात्रिकालीन 20 बजकर 16 मिनट के लगभग होगा.!

-:’Karwa Chauth 2023: करवा चौथ का पौराणिक महत्व’:-
करवा चौथ पर्व का पौराणिक महत्व धर्म ग्रंथों में प्रतीत होता है. महाभारत से संबंधित कथानुसा अपने वनवास काल के दौरान अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर चले जाते हैं तथा दूसरी ओर पांडवों पर कई संकट आन पड़ते हैं यह सब देख द्रौपदी चिंता में पड़ जाती है और वह भगवान श्री श्रीकृष्ण से इन समस्याओं से मुक्ति पाने का उपाय जानने की प्रार्थना करती है. उनकी विनय सुन कृष्ण द्रौपदी से कहते हैं कि यदि वह कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के दिन करवा चौथ का व्रत रहे तो उन्हें अपने संकटों से मुक्ति मिल सकती है. कृष्ण के कथन अनुसार द्रौपदी ने पूर्ण निष्ठा भव के सतह करवा चौथ का व्रत किया. व्रत के फल स्वरुप पांडवों को पने कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है. अटूट बंधन व सौभाग्य का प्रतीक करवाचौथ व्रत आज के संदर्भ में भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की प्राचीन काल में रहा.!

-:’Karwa Chauth 2023: सरगी’:-
करवा चौथ में सरगी का काफी महत्व है. सरगी सास की तरफ से अपनी बहू को दी जाती है. इसका सेवन महिलाएं करवाचौथ के दिन सूर्य निकलने से पहले तारों की छांव में करती हैं. सरगी के रूप में सास अपनी बहू को विभिन्न खाद्य पदार्थ एवं वस्त्र इत्यादि देती हैं. सरगी, सौभाग्य और समृद्धि का रूप होती है. सरगी के रूप मंा खाने की वस्तुओं को जैसे फल, मीठाई आदि को व्रती महिलाएं व्रत वाले दिन सूर्योदय से पूर्व प्रात: काल में तारों की छांव में ग्रहण करती हैं. तत्पश्चात व्रत आरंभ होता है.अपने व्रत को पूर्ण करती हैं.!

-:’Karwa Chauth 2023: करवा चौथ व्रत पूजन विधि’:-
व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प करके करवा चौथ व्रत का आरंभ करना चाहिए. गेरू और पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित बनाया जाता है. पीली मिट्टी से माँ गौरी और उनकी गोद में गणेशजी को चित्रित किया जाता है. गौरी मां की मूर्ति के साथ शिव भगवान व गणेशजी की को लकड़ी के आसन पर बिठाते हैं. माँ गौरी को चुनरी बिंदी आदि सुहाग सामग्री से सजाया जाता है. जल से भरा हुआ लोटा रखा जाता है. रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाते हैं. गौरी-गणेश जी की श्रद्धा अनुसार पूजा की जाती है और कथा का श्रवण किया जाता है. पति की दीर्घायु की कामना करते हुए कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासुजी के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं और उन्हें करवा भेंट करते हैं. रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद चन्द्रमा को अर्घ्य देते हैं इसके बाद पति से आशीर्वाद पाकर व्रत पूर्ण होता है.!

-:’Karwa Chauth 2023: करवा चौथ कथा’:-
इस पर्व को लेकर कई कथाएं प्रचलित है, जिनमें एक बहन और सात बहनों की कथा बहुत प्रसिद्ध है. बहुत समय पहले की बात है, एक लडकी थी, उसके साथ भाई थें, उसकी शादी एक राजा से हो गई. शादी के बाद पहले करवा चौथ पर वो अपने मायके आ गई. उसने करवा चौथ का व्रत रखा, लेकिन पहला करवा चौथ होने की वजह से वो भूख और प्यास बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी. वह बडी बेसब्री से चांद निकलने की प्रतिक्षा कर रही थी.!
उसके सातों भाई उसकी यह हालत देख कर परेशान हो गयें. वे सभी अपने बहन से बेहद स्नेह करते थें. उन्होने अपनी बहन का व्रत समाप्त कराने की योजना बनाई. और पीपल के पत्तों के पीछे से आईने में नकली चांद की छाया देखा दी. बहन ने इसे असली चांद समझ लिया और अपना व्रत समाप्त कर, भोजन खा लिया. बहन के व्रत समाप्त करते ही उसके पति की तबियत खराब होने लगी.!
अपने पति की तबियत खराब होने की खबर सुन कर, वह अपने पति के पास ससुराल गई. और रास्ते में उसे भगवान शंकर पार्वती देवी के साथ मिलें. पार्वती देवी ने रानी को बताया कि उसके पति की मृ्त्यु हो चुकी है, क्योकि तुमने नकली चांद को देखकर व्रत समाप्त कर लिया था.!
यह सुनकर बहन ने अपनी भाईयों की करनी के लिये क्षमा मांगी. माता पार्वती ने कहा” कि तुम्हारा पति फिर से जीवित हो जायेगा. लेकिन इसके लिये तुम्हें, करवा चौथ का व्रत पूरे विधि-विधान से करना होगा. इसके बाद माता पार्वती ने करवा चौथ के व्रत की पूरी विधि बताई. माता के कहे अनुसार बहन ने फिर से व्रत किया और अपने पति को वापस प्राप्त कर लिया.!
करवा चौथ का व्रत अपने पति के स्वास्थय और दीर्घायु के लिये किया जाने वाला व्रत है. उत्तरी भारत में यह व्रत आज श्रद्धा व विश्वास की सीमाओं से आगे निकलकर, फैशन और जमाने के नये रंग में रंग गया.!

-:’Karwa Chauth 2023: करवा चौथ नया रुप’:-
करवा चौथ के व्रत का महत्व समय के साथ और भी बढ गया है. समय के साथ आधुनिक और शिक्षित महिलाओं के वर्ग में जहां एक ओर अन्य व्रतों का प्रचलन कम हुआ है, वही करवा चौथ आज अपने प्रेमी, होने वाले पति और जीवन साथी के प्रति स्नेह व्यक्त करने का प्रर्याय बन गया है. आज यह केवल सुहागिनों का व्रत ही न रहकर, पतियों के द्वारा अपनी पत्नियों के लिये रखा जाने वाला पहला व्रत बन गया है.!
देखने में आया है, कि इस व्रत को पति और पत्नी दोनों रखते है, एक-दूसरे के लिये पूरे दिन व्रत करने के बाद रात को किसी रेस्तरां में जाकर दोनों साथ में भोजन भी करते है. यानी इस व्रत का मूल आधार आज आपसी प्रेम और समर्पण रह गया है. कथा, सुनने, निर्जल रहने, चांद को अर्ध्य देने और पति द्वारा पानी पिलाए जाने जैसी रस्में भी निभाने कि पूरी कोशिश कर ली जाती है. पर नौकरी पेशा होने पर सभी रीतियां विधि विधान के अनुसार तो नहीं होती है.!

-:’Karwa Chauth 2023: करवा चौथ पर सजते बाजार’:-
करवा चौथ पर महिलाओं को व्रत करने के साथ ही सजना और संवरना भी बहुत पसन्द है. इस दिन महिलाएं सुन्दर वस्त्र पहनती है. साडियों और फैशन के अनुसार वस्त्रों की दुकानों महिलाओं की भीड से भरी होती है. ब्यूटी पार्लर और सौन्दर्यवर्धक स्थानों पर भी महिलाओं की रुचि विशेष रुप से देखी जा सकती है. महिलओं में न सिर्फ इस दिन श्रंगार कराने आती है. बल्कि हाथों और पैरों में मेंहदी का बाजार भी करवा चौथ पर लाखों रुपये की आय कमा लेता है. श्रंगार कराने के लिये लम्बी लम्बी कतार में खडी होकर प्रतिक्षा करना भी इन्हें इस दिन मंजूर होता है.!

-:’Karwa Chauth 2023: आपसी सामंजस्य को बढाता करवा चौथ’:-
करवा चौथ के व्रत ने बाजारीकरण को कितना लाभ पहुंचाया है, यह तो स्पष्ट है, परन्तु इस पर्व से एक और जो लाभ हुआ है, वह है, यह व्रत वैवाहिक जीवन को सफल और खुशहाल बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. क्योकि करवा़चौथ अब केवल लोक परम्परा न रहकर, भावनाओं के आदान-प्रदान का पर्व बन गया है.!
हमारे समाज की यही खासियत है कि हमारे यहां पौराणिकता में नवीनता का अंश लिये होता है. एक समय था जब यह पर्व पत्नियों के द्वारा किया जाता था, पति के प्रति समर्पण का प्रतीक हुआ करता था. लेकिन आज यह पति-पत्नी के सामंजस्य का प्रतीक बन गया है. समय ने इस व्रत पर्व को अधिक संवेदनशील और प्रेम की अभिव्यक्ति का पर्व बना दिया है. दोनों के एक -दुसरे के लिये व्रत करने से अहसास का बंधन मजबूत होता है.!
समय के साथ बदलते महानगरीय जीवन में जहां पति-पत्नी एक द्सूरे के लिये समय कम निकाल पाते है, इसका कारण दोनों का नौकरी पेशा होना है. समय की कमी के कारण ही दोनों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के अवसर भी कमी ही मिल पाते है.!

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