होलाष्टक विशेषाङ्क

'ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री'

Holashtak 2023
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Holashtak 2023 : नमो नारायण…चन्द्र मास के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका पर्व मनाया जाता है. होली पर्व के आने की सूचना होलाष्टक से प्राप्त होती है.होलाष्टक को होली पर्व की सूचना लेकर आने वाला एक हरकारा कहा जात सकता है.”होलाष्टक” के शाब्दिक अर्थ पर जायें,तो होला+अष्टक अर्थात होली से पूर्व के आठ दिन,जो दिन होता है,वह होलाष्टक कहलाता है.सामान्य रुप से देखा जाये तो होली एक दिन का पर्व न होकर पूरे नौ दिनों का त्यौहार है.धुलेण्डी के दिन रंग और गुलाल के साथ इस पर्व का समापन होता है.!

Holashtak 2023 : -:’होलाष्टक 2023 में कब से कब तक’:-

होलाष्टक आरम्भ – सोमवार 27 फरवरी 2023 से होगा.
होलष्टक समाप्त – मंगलवार 07 मार्च 2023 को होगा.
Holashtak 2023 : इस वर्ष 08 नहीं अपितु 09 दिन का रहेगा होलाष्टक.होलाष्टक का समापन होलिका दहन पर होता है.रंग और गुलाल के साथ इस पर्व का समापन हो जाता है.होली के त्यौहार की शुरुआत ही होलाष्टक से प्रारम्भ होकर धुलैण्डी तक रहती है. इस समय पर प्रकृति में खुशी और उत्सव का माहौल रहता है. इस दिन से होली उत्सव के साथ-साथ होलिका दहन की तैयारियां भी शुरु हो जाती है.!

होलिका पूजन करने के लिये होली से आठ दिन पहले होलिका दहन वाले स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर उसमें सूखे उपले,सूखी लकडी,सूखी खास व होली का डंडा स्थापित कर दिया जाता है.जिस दिन यह कार्य किया जाता है,उस दिन को होलाष्टक प्रारम्भ का दिन भी कहा जाता है.जिस गांव, क्षेत्र या मौहल्ले के चौराहे पर पर यह होली का डंडा स्थापित किया जाता है.होली का डंडा स्थापित होने के बाद संबन्धित क्षेत्र में होलिका दहन होने तक कोई शुभ कार्य संपन्न नहीं किया जाता है.!

होलाष्टक आरम्भ वाले दिन होलिका दहन स्थान का चुनाव किया जाता है.इस दिन इस स्थान को गंगा जल से शुद्ध कर,इस स्थान पर होलिका दहन के लिये लकडियां एकत्र करने का कार्य किया जाता है. इस दिन जगह-जगह जाकर सूखी लकडियां विशेष कर ऎसी लकडियां जो सूखने के कारण स्वयं ही पेडों से टूट्कर गिर गई हों, उन्हें एकत्र कर चौराहे पर एकत्र कर लिया जाता है.! होलाष्टक से लेकर होलिका दहन के दिन तक प्रतिदिन इसमें कुछ लकडियां डाली जाती है.इस प्रकार होलिका दहन के दिन तक यह लकडियों का बडा ढेर बन जाता है.व इस दिन से होली के रंग फिजाओं में बिखरने लगते है. अर्थात होली की शुरुआत हो जाती है. बच्चे और बडे इस दिन से हल्की फुलकी होली खेलनी प्रारम्भ कर देते है.!

Holashtak 2023 -:”होलाष्टक में कार्य निषेध”:-

होलाष्टक मुख्य रुप से पंजाब और उत्तरी भारत में मनाया जाता है.होलाष्टक के दिन से एक ओर जहां उपरोक्त कार्यो का प्रारम्भ होता है. वहीं कुछ कार्य ऎसे भी है जिन्हें इस दिन से नहीं किया जाता है. यह निषेध अवधि होलाष्टक के दिन से लेकर होलिका दहन के दिन तक रहती है. अपने नाम के अनुसार होलाष्टक होली के ठिक आठ दिन पूर्व शुरु हो जाते है.!

होलाष्टक के मध्य दिनों में 16 संस्कारों में से किसी भी संस्कार को नहीं किया जाता है.यहां तक की अंतिम संस्कार करने से पूर्व भी शान्ति कार्य किये जाते है.इन दिनों में 16 संस्कारों पर रोक होने का कारण इस अवधि को शुभ नहीं माना जाता है.होलाष्टक का आशय है होली के पूर्व के आठ दिन हैं, जिसे होलाष्टक कहते हैं.!

धर्मशास्त्रों में वर्णित 16 संस्कार जैसे- गर्भाधान,विवाह,पुंसवन (गर्भाधान के तीसरे माह किया जाने वाला संस्कार),नामकरण,चूड़ाकरण,विद्यारंभ,गृह प्रवेश,गृह निर्माण,गृह शांति, हवन-यज्ञ कर्म आदि नहीं किए जाते,इन दिनों शुरु किए गए कार्यों से कष्ट की प्राप्ति होती है,इन दिनों हुए विवाह से रिश्तों में अस्थिरता आजीवन बनी रहती है अथवा टूट जाती है.घर में नकारात्मकता, अशांति, दुःख एवं क्लेष का वातावरण रहता है.!

Holashtak 2023-:’होलाष्टक पर क्यों नहीं किए जाते मांगलिक कार्य’:-

होलाष्टक पर शुभ और मांगलिक कार्यों को रोक लगा दी जाती है.इस समय पर मुहूर्त विशेष का काम रुक जाता है. इन आठ दिनों को शुभ नहीं माना जाता है. इस समय पर शुभता की कमी होने के कारण ही मांगलिक आयोजनों को रोक दिया जाता है.!

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, दैत्यों के राजा हिरयकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान श्री विष्णु की भक्ति न करने को कहा. लेकिन प्रह्लाद अपने पिता कि बात को नहीं मानते हुए श्री विष्णु भगवान की भक्ति करता रहा. इस कारण पुत्र से नाराज होकर राजा हिरयकश्यप ने प्रह्लाद को कई प्रकार से यातनाएं दी. प्रह्लाद को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तिथि तक बहुत प्रकार से परेशान किया. उसे मृत्यु तुल्य कष्ट प्रदान किया. प्रह्लाद को मारने का भी कई बार प्रयास किया गया. प्रह्लाद की भक्ति में इतनी शक्ति थी की भगवान श्री विष्णु ने हर बार उसके प्राणों की रक्षा की.!

आठवें दिन यानी की फाल्गुन पूर्णिमा के दिन हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को जिम्मा सौंपा. होलिका को वरदान प्राप्त था की वह अग्नि में नहीं जल सकती. होलिका प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाती है. मगर भगवान श्री विष्णु ने अपने भक्त को बचा लिया. उस आग में होलिका जलकर मर गई लेकिन प्रह्लाद को अग्नि छू भी नहीं पायी. इस कारण से होलिका दहन से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता हैं और शुभ समय नहीं माना जाता.!

यदि आप कोई नया वाहन खरीदना चाहते हैं तो होलाष्टक लगने से पहले उसकी बुकिंग करा लें, लेकिन होलाष्टक के दौरान ये न करें. इसके बाद वाहन को होली पर घर लेकर आएं, होलाष्टक के दौरान न लाएं.!

इस दौरान किसी नए व्यवसाय की शुरुआत भी न करें. ज्योतिषीय अनुसार होलाष्टक के दिनों में अधकितर ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं, ऐसे में उनका सहयोग नहीं मिल पाता. इस कारण व्यवसाय में घाटा होता रहता है.!

होलाष्टक के दौरान किसी मकान या प्लॉट की रजिस्ट्री भी न कराएं.!

मकान बनवाने का काम अगर आप होलाष्टक से पहले से करते आ रहे हैं, तो इसे जारी रहने दें, लेकिन इसकी शुरुआत होलाष्टक से नहीं करनी चाहिए.!

कोई व्यवसाय भी इस बीच शुरू नहीं करना चाहिए. ज्योतिषीय कारणों पर नजर डालें तो होलाष्टक के आठ दिनों में ज्यादातर ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं, ऐसे में उनका सहयोग नहीं मिल पाता. इस कारण व्यवसाय में घाटा हो सकता है.!

Holashtak 2023 -:”होलाष्टक की पौराणिक मान्यता”:-

फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर होलिका दहन अर्थात पूर्णिमा तक होलाष्टक रहता है.इस दिन से मौसम की छटा में बदलाव आना आरम्भ हो जाता है. सर्दियां अलविदा कहने लगती है, और गर्मियों का आगमन होने लगता है. साथ ही वसंत के आगमन की खुशबू फूलों की महक के साथ प्रकृ्ति में बिखरने लगती है. होलाष्टक के विषय में यह माना जाता है कि जब भगवान श्री भोले नाथ ने क्रोध में आकर काम देव को भस्म कर दिया था, तो उस दिन से होलाष्टक की शुरुआत हुई थी.!

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