Shiva Puja: शिव पूजन पद्धति

'ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री'

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Shiva Puja: ॐ नमः शिवाय……बम भोले…..सनातन धर्म में देव पूजन भक्ति मार्ग में एक अभिन्न साधना हैं,तथा शिव पूजन से धर्म अर्थ काम व मोक्ष की प्राप्ति होती हैं,भगवान शिव अत्यंत भोले व दयालु हैं.श्री शिव की पूजन जितनी आसान है उतनी ही फलदायी भी है.श्रद्धा के साथ श्री शिव पूजन करने से किसी वस्तु की कमी होने से भी श्री शिव रुष्ट नहीं होते हैं.भगवान शिव की प्रसन्नता हेतु किस विधि से अर्धनारेश्वर का पूजन करें,पावन श्रावण के अवसर पर आज यह जानने का प्रयास करें.!

सर्वप्रथम गणेश पूजन करें.भगवान गणेश को स्नान कराएं.वस्त्र अर्पित करें.गंध,पुष्प,अक्षत अर्पित करें.तत्पश्चात श्री कलश वरुण देवता,तत्पश्चात ओमकार श्री व स्वस्ति का पूजन करें,तदुपरि षोडश मातृका,सप्तघृत मातृका तत्पश्चात पितृ स्मरण तदुपरि सूर्यादिनवग्रह पूजन के तत्पश्चात भगवान शिव का पूजन शुरू करें.गृहस्थ जीवन में भगवान श्री शिव की पारद प्रतिमा का पूजन सर्वश्रेष्ठ कहा गया है.सफेद आक या स्फटिक की प्रतिमा का पूजन से भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है.!

—:Shiva Puja: सकंल्प :—

पूजन शुरू करने से पहले सकंल्प लें.संकल्प अर्थात प्रतिज्ञा अथवा निश्चय करना.संकल्प करने से पहले हाथों मेे जल,फूल व चावल लें.सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करें.अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें.!

—:Shiva Puja: शिव पूजन विधि :—

आवाहन ( शिव जी को आने का न्यौता देना)
ऊँ साम्ब शिवाय नमः आव्हानयामि स्थापयामि कहते हुए मूर्ति पर चावल चढ़ाएं.आवाहन का अर्थ है कि भगवान शिव को अपने घर में आने का बुलावा देना.।
आसन ( शिव जी को बैठने के लिए स्थान देना)
ऊँ साम्ब शिवाय नमः आसनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि कहते हुए आसन दें.आसन का अर्थ है कि भगवान शिव को घर के पूजा घर में विराजने के लिए आसन दिया है.।
पाद्यं ( भगवान शिव के पैर धुलाना)
ऊँ साम्ब शिवाय नमः पादयो : पाद्यं समर्पयामि कहते हुए पैर धुलाएं.।
अर्घ ( हाथ धुलाना)
आचमनी में जल, पुष्प, चावल लें.ऊँ साम्ब शिवाय नमः हस्तयोः अर्घं समर्पयामि कहते हुए हाथों को धुलाएं.।
आचमन (मुख शुद्धि करना)
ऊँ साम्ब शिवाय नमः आचमनीयम् जलं समर्पयामि कहते हुए आचमन के लिए जल छोड़े.आचमन का अर्थ होता है मुख शुद्धि करना.।
पंचामृत से स्नान कराना
ऊँ साम्ब शिवाय नमः पंचामृत स्नानं समर्पयामि कहते हुए पंचामृत से नहलाएं.पंचामृत का अर्थ है कि दूध,दही,शक्कर,शहद व घी का मिश्रण.इन पांचों चीजों से भगवान को नहलाना.।
शुद्ध जल से स्नान कराना
ऊँ साम्ब शिवाय नमः शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि.कहते हुए शुद्ध जल से स्नान कराएं.।
वस्त्र अर्पित करना
ऊँ साम्ब शिवाय नमः वस्त्रोपवस्त्रम् समर्पयामि कहते हुए वस्त्र अर्पित करें.।
गन्ध अर्पित करना
ऊँ साम्ब शिवाय नमः गन्धं समर्पयामि.चंदन, अष्टगंध इत्यादि सुगंधित द्रव्यों को लगाएं.।
पुष्प अर्पित करना
ऊँ साम्ब शिवाय नमः पुष्पं समर्पयामि कहते हुए आक, धतुरा, चंपा के पुष्प चढ़ाएं.।
बिल्व पत्र अर्पित करना
ऊँ साम्ब शिवाय नमः बिल्वपत्रं समर्पयामि कहते हुए बिल्व पत्र अर्पित करें.।
अक्षत (चावल) अर्पित करना
ऊँ साम्ब शिवाय नमः अक्षताम् समर्पयामि.कहते हुए 11 या 21 चावल अर्पित करें.अक्षत का अर्थ है आखा.ध्यान रखें कि अक्षत टूटे हुए न हों.।
धूप दिखाना
ऊँ साम्ब शिवाय नमः धूपम् आघर्पयामि कहते हुए धूप दिखाएं.अपने हाथों से धूप पर से हाथ फिरा कर शिव पर छाया करें.।
दीप दिखाना
ऊँ साम्ब शिवाय नमः दीपम् दर्शयामि.कहते हुए दीपक दिखाएं.अपने हाथों से दीपक पर से हाथ फिरा कर भगवान शिव पर छाया करें.।
आरती करें
ऊँ साम्ब शिवाय नमः आरार्तिक्यम् समर्पयामि कहते हुए आरती अर्पित करें.।
प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करें
भगवान शिव की परिक्रमा करें.शास्त्रों में भगवान शिव की आधी ही प्रदक्षिणा करने का उल्लेख किया गया है.जलाधारी का लंधन नहीं किया जाता है.परिक्रमा करने के बाद भगवान शिव की मूर्ति के सामने यह कहते हुए प्रदक्षिणा समर्पित करें.।
ऊँ साम्ब शिवाय नमः प्रदक्षिणा समर्पयामि।
पुष्पांजलि अर्पित करें
ऊँ साम्ब शिवाय नमः पुष्पांजलि समर्पयामि कहते हुए हाथ में लिए पुष्पों को भगवान शिव को समर्पित कर दें.।
नेवैद्य अर्पित करना
ऊँ साम्ब शिवाय नमः नेवैद्यम् निवेदयामि कहते हुए नैवेद्य का भोग लगाएं.।
मिठाई का भोग लगाएं
ऊँ साम्ब शिवाय नमः मिष्ठान्न भोजनम् समर्पयामि कहते हुए मीठा भोजन मिठाई अर्पित करें.।
पंचमेवा समर्पयामि
ऊँ साम्ब शिवाय नमः पंचमेवा भोजनम् समर्पयामि कहते हुए पंचमेवा अर्पित करें.।
आचमन करना
ऊँ साम्ब शिवाय नमः नेवैद्यांति जलं आचमनम् समर्पयामि कहते हुए आचमन के लिए जल छोड़े.। भगवान को नेवैद्य अर्पित करने के बाद मुख शुद्धि के लिए आचमन करवाया जाता है.।
फल समर्पित करना
ऊँ साम्ब शिवाय नमः फलम् समर्पयामि कहते हुए फल अर्पित करें.।
ताम्बूल ( पान खिलाना )
ऊँ साम्ब शिवाय नमः तांबूल समर्पयामि कहते हुए पान अर्पित करें,भगवान को पान का भोग लगाएं.।
द्रव्य दक्षिणा समर्पित करें
ऊँ साम्ब शिवाय नमः यथाशक्ति द्रव्य दक्षिणा समर्पयामि कहते हुए दक्षिणा समर्पित करें.।
क्षमा-प्रार्थना
क्षमा-प्रार्थना पूजन में रह गई किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए भगवान शिव से क्षमा मांगे,जीवन में सुख समृद्धि बनाये रखने की प्रार्थना करें.।
तत्पश्चात शिवस्तोत्र अथवा ॐ नमः शिवाय का उच्चारण करें और अन्त में भगवान् शिव की आरती करें.!

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