Holika Dahan Muhurat: होलिका दहन विभूति धारण महत्व

वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव।।

ॐ नृसिंहाय नमः…..होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है.इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में किया जाता है.होलिका दहन की अग्नि पवित्र मानी जाती है.इसलिए होलिका दहन की भस्म/विभूति (राख) का भी विशेष महत्व होता है.!

होलिका दहन विशेष श्रद्धा एवं पूजा पाठ के बाद अग्नि में किया जाता हैं.लेकिन क्या आप जानते है कि होलिका दहन के पश्चात उक्त भस्म (विभूति) का भी काफी महत्व होता है.इसे मस्तिक में लगाने से लेकर घर से जुड़ी कई समस्याओं के लिए लाभकारी माना जाता है.!

01.होलिका दहन के दौरान जलती अग्नि को प्रणाम करें.अगर आप किसी कारण होलिका दहन में मौजूद नहीं रह पाएं तो अगले दिन सूर्योदय से पहले भस्म होलिका की तीन बार परिक्रमा करें.!

02.होलिका दहन की विभूति को घर या दुकान की तिजोरी में रखें. इसके अलावा आप जिस स्थान पैसे रखते हों उस स्थान में होलिका की थोड़ी सी विभूति रख दें.इससे कभी पैसों की कमी नहीं होगी और घर व्यापार में बरक्कत बनी रहेगी.!

03. होली दहन के दूसरे दिन होलिका की भष्म अपने घर में अवश्य लाएं और उसे चारों कोनों में डाल दें.ऐसा करने से घर की सारी नकारात्मकता दूर हो जाती है.!

04.होलिका दहन की विभूति को ताबीज़ भरकर गले में धारण करने से शारीरिक मानशिक सुरक्षा प्राप्त होने के साथ उपरीवाधा से ब्यक्ति की पूर्ण सुरक्षा होती हैं.!

05. होलिका दहन की विभूति को पुरुष मस्तक पर लगाएं और महिला अपने गले में लगाएं.इससे समाज में मान-प्रतिष्ठा,यश और ऐश्वर्य वृद्धि होती है.!

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