Sawan Shukla Paksha: 17 से 31 अगस्त तक शुद्ध श्रावण शुक्ल पक्ष

'ज्योतिर्विद डी डी शास्त्री'

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ॐ नमः शिवाय…..सावन के महीने को बहुत ही पवित्र माना जाता है,इस पवित्र महीने में भगवान शिव की उपासना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है,इस पवित्र महीने में भगवान शिव की भक्ति करने से साधकों को बल, बुद्धि एवं विद्या का आशीर्वाद प्राप्त होता है,सावन के प्रत्येक सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक अथवा दूधाभिषेक करने से भगवान शिव जल्द प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाते हैं,प्रत्येक वर्ष श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से सावन के पवित्र महीने की शुरुआत हो जाती है,इस वर्ष 2 महीने का होगा सावन का महीना.!

विक्रम संवत 2080 में सावन का महीना 2 महीने का होने जा रहा है,ऐसा इसलिए क्योंकि इस साल अधिकमास लगने जा रहा है,जिसके कारण सावन का महीना 59 दिनों का होगा। बता दें कि ऐसा खास संयोग 19 वर्षों के बाद बन रहा है। इस वर्ष सावन मास 4 जुलाई को आरंभ होगा और इसका समापन 31 अगस्त को हो जाएगा। जिसमें से 18 जुलाई से 16 अगस्त तक अधिकमास या मलमास रहेगा.।

17 अगस्त से 31 अगस्त के मध्य शुद्ध श्रावण मास का शुक्लपक्ष रहेगा,इस अवधी में मधुश्रवा हरियाली सिंधारा तीज,दुर्वा गणपति व्रत.नाग पंचमी,श्री कल्की जयंती.पवित्रा एकादशी व्रत.सोम प्रदोष व्रत.ऋग्वेदिय उपाकर्म,रक्षाबंधन.हयग्रीव जयन्ती.श्रावण पूर्णिमा तथा संस्कृत दिवस आदि महत्वपूर्ण पर्व त्यौहार आदि का शुभ संजोग बनेगा.!
वेद एवं शास्त्रों में श्रावण मास के महत्व को विस्तार से बताया गया है,मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर व्रत और उपवास करके भगवान शिव को सावन मास में ही पति रूप में प्राप्त किया था,इसके साथ भगवान विष्णु, ब्रह्मा, इंद्र और भगवान शिव के गण श्रावण मास में ही पृथ्वी पर वास करते हैं और अलग-अलग रूपों से भगवान शिव की आराधना करते हैं,श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से सभी दुखों का नाश होता है और साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं,मान्यता यह भी है कि श्रावण मास में द्वादश ज्योतिर्लिंग में से किसी एक के भी दर्शन करने से साधक को अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है.।

-:’श्रावण मास के महत्व की कथा’:-
पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण मास को देवों के देव महादेव भगवान शंकर का महीना माना जाता है|इस संबंध में पौराणिक कथा है कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले उन्होनें महादेव को प्रत्येक जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था| अगले जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया| पार्वती ने युवावस्था के श्रावण महीने में कठोर व्रत कर भगवान शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया| तब से महादेव के लिए यह माह विशेष हो गया|.!

-:’भगवान भोलेनाथ का पूजन’:-
श्रावण माह में भगवान शंकर के पूजन की शुरुआत जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगाजल, आदि से महादेव का अभिषेक कर स्नान कराया जाता है| अभिषेक के बाद बेलपत्र, दूब, कुशा, कमल, राई फूल आदि से शिवजी को प्रसन्न किया जाता है|इसके बाद भोलेनाथ को भोग के रूप में श्रीफल, भाँग, धतूरा चढ़ाया जाता है.!

-:’महादेव के अभिषेक की कथा’:-
महादेव का अभिषेक करने के पीछे एक पौराणिक कथा का उल्लेख है कि समुन्द्र मंथन के समय विष निकलने के बाद जब महादेव इस विष का पान करते हैं तो वो मुर्च्छित हो जाते हैं और उनका गला नीला पड़ने लगता है| इसी कारण उनका नाम ‘नीलकण्ठ’ पड़ा| भगवान् भोले की दशा देखकर सभी देव-देवता भयभीत हो जाते हैं और उन्हें होश में लाने के लिए आसपास की चीज़ों से उन्हें स्नान कराने लगते हैं| इसके बाद से ही जल, दूध आदि से महादेव का अभिषेक किया जाता है.!

-:’भगवान शिव का बेलपत्र से अभिषेक’:-
एक पौराणिक कथा के अनुसार एक भील डाकू परिवार का पालन पोषण करने के लिए लोगों को लुटा करता था| एक दिन डाकू जंगल में राहगीरों को लूटने के इरादे से गया| पुरे दिन के बाद भी कोई शिकार नहीं मिलने से वह काफी परेशान हो गया| इस दौरान वह जंगल में एक बेल के पेड़ पर बैठा पत्तों को तोड़कर नीचे फ़ेंक रहा था| इसी से अचानक डाकू के सामने महादेव प्रकट हो गए और वरदान मांगने को कहने लगे| असल में डाकू जहाँ बेलपत्र फेंक रहा था वहां नीचे शिवलिंग स्थापित था| तबसे शिवजी को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र चढ़ाने का महत्व है.!

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